यूँ ही दिल को अगर गुदगुदाते रहो
यूँ ही आँखें अगर तुम मिलाते रहो
यूँ ही नज़रें अगर तुम चुराते रहो
यूँ ही पास अगर आते रहो, जाते रहो
इक ना इक दिन मोहब्बत, हाँ, मोहब्बत हो जाएगी
मैं भी खो जाऊँगा, तू भी खो जाएगी
यूँ ही दिल को अगर गुदगुदाते रहो
यूँ ही आँखें अगर तुम मिलाते रहो
यूँ ही नज़रें अगर तुम चुराते रहो
यूँ ही पास अगर आते रहो, जाते रहो
इक ना इक दिन मोहब्बत, हाँ, मोहब्बत हो जाएगी
मैं भी खो जाऊँगा, तू भी खो जाएगी
जब मोहब्बत की भड़केंगी चिंगारियाँ
'गर बुझाया उन्हें तो उठेगा धुआँ
जब कभी शर्म से चुप रहेगी ज़ुबाँ
बोल उठेंगी आँखों की खामोशियाँ
यूँ ही तूफ़ाँ दिल में उठाते रहो
यूँ ही हमें यूँ सताते रहो
यूँ ही ज़ख्मों पे मरहम लगाते रहो
यूँ ही पास अगर आते रहो, जाते रहो
इक ना इक दिन मोहब्बत, हाँ, मोहब्बत हो जाएगी
मैं भी खो जाऊँगा, तू भी खो जाएगी
गुनगुनाती हुई रात जब आएगी
खुद-ब-खुद आँखों से नींद उड़ जाएगी
दिन-ब-दिन धड़कने और होंगी जवाँ
होश ऐसे में होगा हमें फिर कहाँ
यूँ ही ये जाँ हम पे लुटाते रहो
यूँ ही क़दमों में दिल को बिछाते रहो
यूँ ही सीने से हमको लगाते रहो
यूँ ही पास अगर आते रहो, जाते रहो
इक ना इक दिन मोहब्बत, हाँ, मोहब्बत हो जाएगी
मैं भी खो जाऊँगा, तू भी खो जाएगी